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Wednesday, November 13, 2013

फिर वही दर्द



हर बार क्यूँ
इस इम्तेहान
इस दर्द
के दौर से गुजरना
पड़ता है ,
मन लगाने के तो
कई साधन है,
पर वो जो
इस मन को सुकून दे
जिससे सब कुछ बाँट कर
मन हल्का हो सके ,
वो कहीं दूर
जा बैठा है ,
हमेशा सोचती हूँ
ये आखिरी बार है,
पर हर बार फिर
वही दर्द ,वहीँ कश्मकश
सामने खड़ा दीखता है ,


"जो तू नहीं मेरे पास
तो बस तन्हाई है आस-पास "

रेवा

11 comments:

  1. आखरी बार आखिर में आता है
    ये जिंदगी है
    ऐसे मामले बार बार आते हैं
    हार्दिक शुभकामनायें

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  2. बहुत सुन्दर .
    नई पोस्ट : फिर वो दिन

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  3. इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :- 14/11/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक - 43 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....

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  4. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरेया

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  6. कोमल भाव...
    भावपूर्ण रचना...

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  7. सुंदर
    तनहाई के दर्द को झेलती कविता

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  8. बहुत भावपूर्ण रचना...

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