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Sunday, November 17, 2013

सालों की मेहनत



मेरे सालों की
मेहनत रंग लायी 
मेरे प्यार और 
समर्पण ने 
अब तुम्हे भी 
प्यार करना 
सिखा ही दिया

अब मेरी मौज़ को
किनारा  ,
मेरे आँसुओं को
मंज़िल मिल गयी ,

मन तृप्त और संतुष्ट
हो गया ,
आखिर मेरे कान्हा ने
मेरी पुकार
मेरी गुहार सुन ली।

"जब लगा जीवन में
सबकुछ गयी हार ,
तो तूने लिया सम्भाल
भर दिया प्यार से मेरा संसार
कर दिया मुझे मालामाल "


रेवा 

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर शब्द समायोजन -बहुत सुन्दर !
    नई पोस्ट मन्दिर या विकास ?
    नई पोस्ट लोकतंत्र -स्तम्भ

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  2. अद्धभुत उम्दा अभिव्यक्ति
    हार्दिक शुभकामनायें

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