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Wednesday, August 6, 2014

सीली यादें



आहा ! प्यार भरी वो बारिश.......
सदा याद रहेगी मुझको
जी भरकर भीगे थे हम......
हर लम्हा हर पल
जीया था हमने
इन्द्रधनुषी सपने जैसा ,
पर बरसात के मौसम की तरह
तुम भी अब गुम हो गए हो कहीं ..........
कई मौसम आये गए
पर तुम न आये ,
अब तो बस
रह गयी है
कुछ सीली यादें …..

अलमारियों मे
बंद खतों मे अब
फफूँदी लग गयी है ,
जिसे हर बरसात के
बाद साफ़ कर धुप मे
रख देती हूँ ..........

दिल की दीवारों से भी अब
पपड़ी बन झड़ने लगी है
तुम्हारी यादें ,
और धब्बे नज़र आने लगे हैं
उन पर दुबारा कितना भी रंग
क्यों न चढ़ा लो ,
वो अपने होने का एहसास
करा ही जातें हैं.………

पर फिर भी
किसी न किसी
रूप मे बनी रहती
हैं ये यादें

रेवा

19 comments:

  1. टीसती यादों की खूबसूरत अभिव्यक्ति !

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 07-08-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1698 में दिया गया है
    आभार

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  3. सीलन नहीं सही होती चाहे कितनी भी रंगाई कर लें। .बहुत सुन्दर

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    Replies
    1. swatiji mere blog par swagat hai apka....shukriya

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  4. सुन्दर रचना...

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  5. bahut badhiya ji ....lekin sa par chhoti " e " nahi balki badi " e " ki matra lagni chahiye ....nahi to matlab ulta nikal raha hai .....sila ka hindi main maltlab hoga , jaise kapda silna .....yahan aapne geele pan se matlab diya hai to aapko seela likhna hoga .....aap bura naa mane , main koi bahut badi likhne wali nahi hun lekin hindi me chuk hote hi matlab badl jata hai ...

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  6. Nahi bilkul bura manne wali baat nahi hai......bauki galti ki aur dhyan dilane ka shukriya. ....age bhi bejijhak batate rahiyega...yahi asha hai

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  7. बहुत सुन्दर भावप्रणव रचना।

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  8. बेहतरीन प्रस्तुति...

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  9. बहुत सुन्दर रचना

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  10. This comment has been removed by the author.

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  11. खूबसूरत अहसासों के साथ , बेहद सुंदर रचना । बधाई

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