प्यार शब्द खुद मे इतना प्यारा है की इसे किसी परिभाषा की ज़रूरत नहीं ……ये एक एहसास है जो बस महसूस किया जा सकता है,पर इसके साथ ये भी सच है की प्यार की बड़ी बड़ी बातें सभी लोग कर लेते है……पर सच्चा प्यार बहुत कम लोगों के नसीब मे होता है……ये भी माना के प्यार दर्द भी देता है पर अगर ये सच्चा है तो संतुष्टि भी देता है…ऐसा प्यार हमे प्रभु के और करीब ले जाता है …ये मेरी भावनाएं और एहसास , इन्हीं को शब्द देने की कोशिश है मेरी …....
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Thursday, March 17, 2016
Monday, February 8, 2016
लेखन कला
लिखती हूँ मिटाती हूँ
जाने क्यों
कविता नहीं बुन पाती हूँ
कविता नहीं बुन पाती हूँ
कभी दोहे की तलाश मे
अटक जाती हूँ
अटक जाती हूँ
कभी शब्द टंग जातें है दिल के
तारों पर
तो कभी एहसास
दगा दे जातें हैं
कभी लगता है छन्द मे बंध गए
मेरे सवाल
तो कभी
छंद मुक्त कविताओं मे
छंद मुक्त कविताओं मे
निकलता है
दिल का गुब्बार ,
तो कभी हो जाता
मुझे क्षणिकाओं से प्यार ,
दिल का गुब्बार ,
तो कभी हो जाता
मुझे क्षणिकाओं से प्यार ,
पर चाहे जो भी लेखन कला
ये शब्दों का जाल
ये शब्दों का जाल
दिल मे जगाता रहता है
कलम और कागज़ से प्यार
रेवा
कलम और कागज़ से प्यार
रेवा
Monday, January 11, 2016
औरत
औरत
नाम है ऐसे जीव का
जो हमेशा पिसती रहती है
दो पाटों मे
कभी ससुराल तो
कभी मायके के नाम पर
कभी पति तो कभी
बच्चों के नाम पर .....
उसके मन की बात कभी
कोई नहीं सुनता
क्योंकि वो खुद की
कहाँ सुनती है ??
एक घर जन्म का
एक घर कर्म का
पर न वो जन्म
वालों की हो पाती है
न कर्म वालों की
ता उम्र दोनों के लिए
परायी बन
गुज़ार देती है
तमाम रिश्तों के बीच
परायी स्त्रियों को
सलाम मेरी इस
लेखनी द्वारा
न कर्म वालों की
ता उम्र दोनों के लिए
परायी बन
गुज़ार देती है
तमाम रिश्तों के बीच
परायी स्त्रियों को
सलाम मेरी इस
लेखनी द्वारा
और अंत में कहना चाहूँगी
"बेटी हूँ बहू हूँ
बीवी हूँ माँ हूँ
पर सबसे पहले
हाड़ मांस की इन्सान हूँ
रेवा
"बेटी हूँ बहू हूँ
बीवी हूँ माँ हूँ
पर सबसे पहले
हाड़ मांस की इन्सान हूँ
रेवा
Saturday, December 19, 2015
मटर
ठण्ड के आगमन के साथ
मटर सबके घरों मे
ख़ुशी ख़ुशी आई,
सारी गृहणियाँ को
ये बहुत सुहाई
अब घण्टो की
सोच हुई कम
जबसे मटर रानी
बोली आ गए हम ,
मटर को सबके साथ
घुला मिला
स्वादिष्ट व्यंजन सबने बनाई
इसी बात पर तो ये मटर रानी
इतराई ,
और फ़िलहाल
100 रुपया किलो मे आई ,
फिर भी सभी के मन भाई
भिन्डी , तोरु , परवल
हुए सब फीके
जबसे घरों मे
मटर रानी आई ,
अब तो सभी ने
यही पुकार लगाई
जय हो मटर रानी
जय हो मटर रानी !!
मटर सबके घरों मे
ख़ुशी ख़ुशी आई,
सारी गृहणियाँ को
ये बहुत सुहाई
अब घण्टो की
सोच हुई कम
जबसे मटर रानी
बोली आ गए हम ,
मटर को सबके साथ
घुला मिला
स्वादिष्ट व्यंजन सबने बनाई
इसी बात पर तो ये मटर रानी
इतराई ,
और फ़िलहाल
100 रुपया किलो मे आई ,
फिर भी सभी के मन भाई
भिन्डी , तोरु , परवल
हुए सब फीके
जबसे घरों मे
मटर रानी आई ,
अब तो सभी ने
यही पुकार लगाई
जय हो मटर रानी
जय हो मटर रानी !!
रेवा
Friday, November 27, 2015
आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा ……
आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा ……
बीते लम्हों मे भरा एतबार पढ़ा
हँसी और आंसुओं का सैलाब पढ़ा
आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा ……
खुद के लिए तुम्हारी फ़िक्र तुम्हारा ख्याल पढ़ा
भुखी दुपहर को तुम्हारा इंतज़ार पढ़ा
आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा ……
सिंदूरी शामों को कॉफ़ी का साथ पढ़ा
बेक़रार रातों को तुम्हारा एहसास पढ़ा
आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा ……
झूठे वादों का अल्फ़ाज़ पढ़ा
टूटती सांसों से यादों का कलमा पढ़ा
आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा ……
रेवा
Thursday, November 19, 2015
Monday, October 19, 2015
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