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Sunday, February 14, 2010

मेरे मन की बगिया मे





मेरे मन की छोटी सी बगिया में ,


अपने प्यार का फुल हमेशा खिलाये रखना

चाहे जैसे भी मौसम आये उसे हरा भरा रखना ,


पतझड़ हो या बसंत ,


बारिश हो या कड़ी धुप ,


मिल कर बाँट लेंगे हर सुख दुःख ,

बस मेरे मन की छोटी सी बगिया में

अपने प्यार का फुल हमेशा खिलाये रखना ..........




रेवा 



Saturday, February 13, 2010

क्यों

प्यार को प्यार क्यों चाहिए ?
कशिश को तड़प क्यों चाहिए ?
दर्द को दवा क्यों चाहिए ?
दिल को सुकून क्यों चाहिए ?
आँसुओं को पनाह क्यों चाहिए  ?                   
दामन को खुशियाँ क्यों चाहिए ?
आँखों को शीतलता क्यों चाहिए ?
होंठो को मुस्कान क्यों चाहिए ?
ज़िन्दगी को मौत क्यों चाहिए ?
क्यों क्यों ..................

रेवा

Tuesday, January 26, 2010

ओस की बूंद








ओस की बूंद सी है
मेरी ज़िन्दगी
सिमटी सकुची
खुद में ,
अकेले तन्हा
पत्ते की गोद
पर बैठी ,
सूर्य की
किरणों के साथ ,
चमकती, दमकती,
इठलाती 
मन में कई
आशाएं जगाती,
हवा के थपेड़ो को
झेलती, सहती 
फिर उसी मिट्टी में
विलीन हो जाने को
आतुर रहती ....
ओस की बूंद सी है
मेरी ज़िन्दगी

रेवा

Tuesday, December 29, 2009

मन करता है


मन करता है धुप की चादर ओढ़ कर सो जाऊं ............

खो जाऊं  उस दुनिया में जहाँ ,न गम हो

न आँसू ,ना कोई दुःख ..........


मन करता है धुप की चादर ओढ़ कर सो जाऊं  ...........

तेरी गोद हो सर रखने को ,

तेरी बाँहो का बिस्तर हो ,

और प्रेम  भरा तेरा स्पर्श हो ,


मन करता है धुप की चादर ओढ़ कर सो जाऊं ............

इस ठण्ड की भरी दुपहरिया मे ,

बस मै हूँ और तुम हो ,

और हो हमारे प्यार की खुशबू हर तरफ ,


मन करता है धुप की चादर ओढ़ कर सो जाऊं  ........


रेवा



Tuesday, December 15, 2009

काश !


काश तुमने मुझे कभी तो समझा होता .......

एक पल नज़र भर के देखा तो होता ,
एक पल मेरी नजरों को पढ़ा तो होता ,
एक पल मेरी तड़प को महसूस किया तो होता,
काश तुमने मुझे कभी तो समझा होता ........

जब जब तेरी जरूरत महसूस हुई दूर ही पाया तुझको ,
जब जब तेरे करीब गई दूर ही पाया तुझको ,
जब जब तेरे पहलु में पनाह मांगी दूर ही पाया तुझको ,
काश तुमने मुझे कभी तो समझा होता ..........

अब तो ये आलम है की दर्द लहू बन कर रिसता रहता है ,
आँखों से आंसू ऐसे बरसते है जैसे बादल से बारिश की बुँदे ,
हँसी होंठो का साथ देने से इंकार करती है ,
काश तुमने कभी मुझे दिल से महसूस तो किया होता ,
काश तुमने मुझे कभी तो समझा होता .....................

रेवा

Wednesday, December 9, 2009

क्या खोया क्या पाया












आज जब अपनी ज़िन्दगी के बारे मे सोचा,

इतने दिनों मे मैंने क्या खोया क्या पाया
तो पता चला की खोया तो शायद बहुत कुछ .....

कभी अपना सुख ,कभी अपने दुःख
कभी अपनी हँसी ,कभी अपने आँसू
कभी अपना सपना ,कभी कोई अपना
कभी अपना जोश ,कभी अपने रोष
कभी अपनापन ,कभी परायापन
कभी अपनी अभिलाषा ,कभी अपनी निराशा
कभी प्यार ,कभी दुलार
कभी अपना अस्तित्व ,कभी अपनी पहचान

पर इन सब के बीच बस पाया है एक साथ
ये कागज और ये कलम
ये कागज और ये कलम ....................

रेवा

Wednesday, December 2, 2009

मन

अपने मन को कैसे वश मे करू
क्यों यह भागता रहता है
क्यों भावुकता मे बहता रहता है
जब यह जानता है की भावुकता की कोई कदर नही फ़िर भी.............

क्यों भवनाएँ इतनी कोमल होती है
की जरा सी ठेस बर्दाश्त नही कर पाती ...............
क्यों आँखों से यह अश्रु धार अविरल बहते है

क्यों यह मन आहत होते हुए भी बन्धनों मे
बंधता रहता है .............
क्यों .........

रेवा