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Monday, September 30, 2013

दूरियां


जैसे जैसे तुम्हारे जाने का
वक़्त नज़दीक आ रहा है ,
मन अजीब सा हो रहा है
पर इन कुछ दिनों मे
जो पल तुम्हारे साथ बिताये
उन्हें अपना सहारा बनाउंगी
जब तुम्हार कंधे की याद आयेगी तो
तकिये पर सर टिका लिया करुँगी ,
आंसुओं से नहीं
तुम्हारी यादों से
खुद को भिगोउंगी ,
इतनी कशिश
इतनी शिद्दत से
तुम्हे अपने पास महसूस करुँगी की
तुम भी मुझे
प्यार किये बिना
न रह पाओगे
चाहे दूर से ही सही ,

"अपने प्यार की चांदनी मे भिगोना है तुझे
इन दूरियों को इस बार भरपूर जीना है हमे"

रेवा

Friday, September 27, 2013

मौन



मन की पीड़ा
मन की उलझने
बढती जा रही हैं निरंतर ,
मन क्लांत
तन शिथिल हो गया है ,
लग रहा है
एक प्रश्न चिन्ह जी रही हूँ मैं,
सब कोशिशे नाकाम हो रही हैं
दिशाहीन सा महसूस हो रहा है ,
अंततः अपने खोल मे सिमट कर
मौन ओढ़ लिया है मैंने ,
शायद कुछ दिनों का मौन
खुद का खुद से साक्षात्कार करवा
कोई राह दिखा सके /

"ऐसे मोड़ पर ले आयी है ज़िन्दगी
हर तरफ मिली है बस रुसवाई "

रेवा

Friday, September 20, 2013

तेरा प्यार मेरी आदत




तेरे बारे मे
सोचने बैठूं तो,
दिन कब शाम की
आगोश मे समां जाता है
पता ही नहीं चलता ,
कभी मुझे लगता है
तुम मुझसे
कितना प्यार करते हो,
ऐसे मेरी परवाह करते हो
जैसे चाँद अपनी चांदनी की
कभी लगता है
मुझे जरा भी नहीं मानते
ऐसे छोड़ दिया है मुझे
जैसे घर का पुराना सामान ,
इस ख्याल से ही
रोष और दुःख से भर उठती हूँ ,
पर अगले ही पल
ठंडी हवा के झोंके सी
तुम्हारी आवाज़ याद आ जाती है
और मैं तुम्हारी आवाज़
सुनने को आतुर हो उठती हूँ ,
कोशिश कर के भी
खुद को रोक नहीं पाती ,
खुद पहल कर के
तुझसे बात कर ही लेती हूँ ,
उफ़ ये तेरा प्यार
सच मे दीवाना बना दिया है मुझे

"तेरा प्यार मेरी आदत
और ये आदत
मेरी ज़िन्दगी बन गयी है "

रेवा

Saturday, September 14, 2013

मुझे प्यार है तुमसे



न मौत की ख़बर देते हैं
न ज़िन्दगी की
फिर कहते हैं
मुझे प्यार है तुमसे ,

अस्तित्वहीन कर
चले जाते हैं ज़िन्दगी से एक दिन,
सालों की दुरी के बाद
नींद से जागते हैं और
फिर कहते हैं
मुझे प्यार है तुमसे,

कहते हैं मर जाऊंगा तुम बिन ,
सुन लूँ तुम्हारी आवाज़ एक बार
फिर मौत भी आये तो गम नहीं
क्युकी मुझे प्यार है तुमसे

वाह रे प्यार
कब ज़ोर मारता है
कब थम जाता है
पता ही नहीं चलता ,
फिर भी बार बार
यही कहता है "मुझे प्यार है तुमसे"

रेवा

Saturday, September 7, 2013

क्षणिक मुलाकात






 "लग जा गले की फिर ये हसीं
  रात हो न हो शायद फिर इस जन्म मे
  मुलाकात हो न हो  "

आज जब ये गीत सुना तो
अचानक तेरी याद आ गयी
गीत लगा मेरी लिए ही बना हो  ,
तुझसे वो एक क्षणिक मुलाकात
स्मरण हो आया  ,
उस लम्हा जैसे वक़्त
रुक सा गया था ,
धड़कने मद्धम गति
से चलने लगी थी ,
और ये सुखद एहसास
बस तेरे करीब होने से हुआ था ,
ये आँखें
बरबस ही बेहने लगी ,
उस छोटी सी मुलाकात मे
ये अफ़सोस तो हमेशा रहेगा की
तुम्हे गले न लगा पाई ,
पर तुम कितने अच्छे इंसान हो
वो उस दिन पता चला  ,
आज भी मुझे खुद पर
गर्व महसूस होता है की
मैंने तुम्हे दिलोजान से प्यार किया /

रेवा


Thursday, September 5, 2013

शिक्षक दिवस और मेरे पापा


आज शिक्षक दिवस के दिन
अपने तमाम गुरुजनों के
साथ साथ मैं अपने सबसे बड़े गुरु
अपने पिता को नमन
करना चाहती हूँ ,
जीवन दान और कन्यादान के
साथ साथ जिंदगी
जीने का ज्ञान भी उन्होंने दिया ,
समाज मे सर उठा कर
जीने का सम्मान उन्होंने दिया ,
खाना बनाने से लेकर
हर छोटी बड़ी चीजों का
ज्ञान उन्होंने दिया ,
सदा मेरी सूरत देख कर
मेरी समस्यों का
निवारण उन्होंने किया ,
९ साल की छोटी सी उम्र मे
अपने माता पिता
और भाइयों को खोकर भी
जीवन से हार माने बिना ,
अपना बिज़नस खड़ा किया
और अपने परिवार का
भरन पोषण किया ,
आज वो इस दुनिया मे नहीं हैं
पर हर पल उनका
आशीर्वाद मेरे साथ है ,
पलकें भीगती जरूर है
उन्हें याद करके
पर चहरे पर फिर भी मुस्कान
बनी रहती है ,
मैं आज इश्वर से बार बार
ये कामना करती हूँ की
भगवान ! उनके जैसा गुरु
सबको दे।

"पापा मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ "

रेवा


Sunday, September 1, 2013

मूक एहसास



मुझे ख़ामोशियों से प्यार हो गया है
क्युकी वोही तेरी जुबान है
और अब मैंने उनसे
बात करना सीख लिया है,

नहीं करुँगी अब कोई
शिकवा शिकायत
तेरी चुप्पी मे अपने लिए
प्यार देखना सीख लिया है ,

बार बार नहीं पूछूँगी
तेरी उदासी का सबब
तेरी आँखों मे छुपी
उदासी पढना जो सीख लिया है ,

नहीं करुँगी अविश्वाश
तुझ पर
तेरे मूक एहसासों को
महसूस करना जो सीख लिया है

रेवा