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Saturday, September 14, 2013

मुझे प्यार है तुमसे



न मौत की ख़बर देते हैं
न ज़िन्दगी की
फिर कहते हैं
मुझे प्यार है तुमसे ,

अस्तित्वहीन कर
चले जाते हैं ज़िन्दगी से एक दिन,
सालों की दुरी के बाद
नींद से जागते हैं और
फिर कहते हैं
मुझे प्यार है तुमसे,

कहते हैं मर जाऊंगा तुम बिन ,
सुन लूँ तुम्हारी आवाज़ एक बार
फिर मौत भी आये तो गम नहीं
क्युकी मुझे प्यार है तुमसे

वाह रे प्यार
कब ज़ोर मारता है
कब थम जाता है
पता ही नहीं चलता ,
फिर भी बार बार
यही कहता है "मुझे प्यार है तुमसे"

रेवा

17 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति ,आभार

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (15-09-2013) मातृभाषा का करें सम्मान : चर्चामंच 1369 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    हिन्दी पखवाड़े की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. This comment has been removed by a blog administrator.

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  3. बहुत सुंदर सृजन ! बेहतरीन प्रस्तुति !!

    RECENT POST : बिखरे स्वर.

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  4. Bahut Sundar Jazbaaton Ka Tana-Bana

    Maut Ek Param Saty Hai. Jo Janm Liya
    Use Ek Din Jana Hi Hai. Ye Jeevan Me
    Jo Kisi Ka Saath Milta Hai, Wo Maya Hai.
    Dar Asal Kisi Ka Saath Nahi Hota....
    Ek Chhalawe/Bhram/Moh Me Humlog
    Zindagi Ko Jiye Jaa Rahe Hain..Or Kahte Hain
    ''Mujhe Pyaar Hai Tumse''
    Saadar.

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  5. बहुत बेहतरीन..

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  6. बहुत सुन्दर भाषा
    सुन्दर प्रस्तुति

    जंगल की डेमोक्रेसी

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  7. Bahut sundar bhav bikherti rachana!

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  8. बहुत सुंदर भाव और अभिव्यक्ति !!

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  9. आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल {बृहस्पतिवार} 19/09/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" पर.
    आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

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  10. वाह! बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

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