Followers

Wednesday, March 11, 2015

श्याम का प्यार (लघु कथा )


लता वैसे तो एक वैश्या थी ,उसे पता था की एक आम औरत की ज़िन्दगी वो नहीं जी सकती ……… पर थी तो एक लड़की ही न.......... मन होता था की उसका भी घर बार हो प्यार करने वाला पति  हों....... वो भी हर त्यौहार अपने परिवार के साथ मनाये। भगवान से रोज़ प्रार्थना करती..........
पता नहीं उसकी प्रार्थनाओं का असर था  या भगवान को उस पर दया आ गयी , श्याम वैसे तो उसका कस्टमर
बन कर आया था पर उसे लता  से प्यार हो गया , और किसी तरह महीने भर मे उसकी मालकिन को पैसे दे कर शादी कर ली ,और गांव ले आया ……… और आज वो होली दहन के दिन सर ढक कर पूजा कर रही है और फेरी ले रही है ,आज उसकी बरसो पुरानी इच्छा पूरी हो गयी।


रेवा टिबड़ेवाल  

13 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12-03-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1915 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. madan ji sawal tho hai ye......par aisa namumkin tho nahi pyar mey badi takat hoti hai

    ReplyDelete
  3. Haan Rewa ji bamushqil hi sahi..magar love has a power......kuch bhi kar sakta hai....umra naiN doulat nahiN ....dil se raahat hoti hai...bahut hi khoob

    ReplyDelete
  4. क्या यह काहानी हैं, हाँ, कहानी ही होगी। कहानी ही इतनी मिठ्ठी हो सकती हैं................ सच तो हमेशा कड़वा ही होता हैं।

    ReplyDelete
    Replies
    1. savan kumar ji sach hamesha kadva nahi hota.....kahani jarur hai par isay sach bhi banaya ja sakta hai

      Delete
  5. चंद कहानियाँ एक सो इक्कीस करोड़ लोगों का सच नहीं हो सकता ............. हमारे आस पास हजारों कहानियाँ बिख़री हैं सभी सच तो नहीं हैं........... लेकिन हमें कोशिश अवश्य करनी चाहिए, इन्हें सच करने की...................

    ReplyDelete
    Replies
    1. ji sahi kaha....koshish rehni chahiyee

      Delete