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Friday, March 6, 2015

कोई और रंग



नहीं चढ़ता अब कोई और रंग
उस एक रंग के चढ़ने के बाद ,
चेहरे का रंग लाल हो गया
उसके एक स्पर्श के साथ ,
साँसें गुलाबी हो गयी
आलिंगन मे समाने  के बाद ,
मैं राधा और वो कान्हा बन गया
इस प्यार की डोर के साथ !

रेवा


17 comments:

  1. बहुत सुंदर . होकी की शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट : मी कांता बाई देशमुख आहे

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  2. रंगों के महापर्व होली की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (07-03-2015) को "भेद-भाव को मेटता होली का त्यौहार" { चर्चा अंक-1910 } पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. abhar mayank ji....apko bhi holi ki dheron shubhkamnayein

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  3. sach me ...preet ka rang hi aisa hota hai ...

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  4. बहुत सुन्दर ,प्यार का रंग तो सदैव एक ही होता है चाहे वह कभी ही हो किसी से भी हो

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  5. प्रीत का पक्का रंग नही उतरता ...सुंदर प्रस्तुति

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  6. वाह, बहुत खूब

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  7. Sundar aur prasangik rachna...holi ki shubhkamnaye :)

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    1. shukriya Ankur ji...apko bhi holi ki dhero shubhkamnayein

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  8. ये रंग नहीं फूल हैं ऋतुराज की ससुराल के
    आपको सपरिवार होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ .....!!
    http://savanxxx.blogspot.in

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  9. राधा कृष्ण हो जाना ही नियति है जीवन की ... जितना जल्दी हो सके ...
    सुन्दर भावमय रचना ...

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