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Saturday, July 21, 2018

नयी यादें




जानते हो
तुम्हारी याद
बेतरह आती है
और मेरे ख्यालों में
हर मुलाकात
महकती रहती है

आँखों की बरसात
मिलवाती है उस
सूखी छतरी से
जिसके होते हुए
भीगना बहुत भाया था
हम दोनों को

कैफ़े का वो टेबल और
मेरी पसंदीदा कॉफ़ी
तेरे बिना
मुझे मुंह चिड़ाते हैं
पर तब  अनायास ही
कॉफ़ी से और इश्क हो जाता है

हाथों में कभी कभी
लगता है तेरे हाथ
रह गए हैं
बस ऐसे ही तुझसे जुड़ी
हर चीज़ को  महसूसते
मुस्कुरा कर चल पड़ती हूँ
नयी यादें बनाने ........


#रेवा








4 comments:

  1. बस ऐसे ही तुझसे जुड़ी
    हर चीज़ को महसूसते
    मुस्कुरा कर चल पड़ती हूँ
    नयी यादें बनाने ........ बहुत सुंदर भाव 👌👌

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (23-07-2018) को "एक नंगे चने की बगावत" (चर्चा अंक-3041) (चर्चा अंक-3034) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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