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Thursday, July 19, 2018

कौन हूँ मैं ??



कौन हूँ मैं ??
एक नारी
बहुत आम सी
साँवले रंग वाली
गढ़ी गयी थी मैं
जिस गढ़त में
कई सालों तक
उसी के साथ चली
सीखी थीं जो बातें
उन्हें ही सच मानती रही
पर दुनिया कुछ और ही है
ये बात धीरे धीरे पता चली.....

तो मैंने दुबारा से ख़ुद को गढ़ा
एक नया चेहरा बनाया
जो मुझे बहुत पसंद आया
अक्षरों से दोस्ती की
और अपनी एक
नई दुनिया बनायी
जो इन किताबों से शुरू
होकर लफ़्ज़ों के रास्ते
तय करते हुए
कलम तक जाती है
और सुकून से भर
देती है मन ....


#रेवा

10 comments:

  1. वाह बेहतरीन रचना

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  2. नारी के अस्तित्व को तलाशती सुंदर भावप्रवण रचना...

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (21-07-2018) को "गीतकार नीरज तुम्हें, नमन हजारों बार" (चर्चा अंक-3039) (चर्चा अंक-2968) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत सुन्दर

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