जानते हो कई बार
मैंने तुमसे और
तुमने मुझसे
पुछा है की ,
ऐसी कौन सी
बात है तुम में
की मै तुमसे
जुड़ गयी और
तुम मुझसे ,
पर शायद
इसका जवाब
न तुम्हारे पास है
और न मेरे पास ,
न हमारे रिश्ते
का कोई नाम है
न कोई स्वार्थ ,
यह तो बस समर्पण है
एक दूजे के एहसासों का ..................
रेवा
मैंने तुमसे और
तुमने मुझसे
पुछा है की ,
ऐसी कौन सी
बात है तुम में
की मै तुमसे
जुड़ गयी और
तुम मुझसे ,
पर शायद
इसका जवाब
न तुम्हारे पास है
और न मेरे पास ,
न हमारे रिश्ते
का कोई नाम है
न कोई स्वार्थ ,
यह तो बस समर्पण है
एक दूजे के एहसासों का ..................
रेवा