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Wednesday, August 6, 2014

सीली यादें



आहा !
प्यार भरी वो बारिश
सदा याद रहेगी मुझ को
जी भरकर भीगे थे हम
हर लम्हा हर पल
जीया था हमने
इन्द्रधनुषी सपने जैसा

पर बरसात के मौसम की तरह
तुम भी अब गुम हो गए हो कहीं
कई मौसम आये गए
पर तुम न आये
अब तो बस
रह गयी है
कुछ सीली यादें

अलमारियों में
बंद तुम्हारे खतों में अब
फफूँद लग गयी है
जिसे हर बरसात के
बाद साफ़ कर धूप में
रख देती हूँ ...

दिल की दीवारों से भी अब
पपड़ी बन झड़ने लगी है
तुम्हारी यादें और
धब्बे नज़र आने लगे हैं

मैंने सोचा उन पर
वास्तविकता
का रंग लगा दूँ
पर दोबारा उन पर
कोई भी रंग
क्यों न चढ़ा लो
वो अपने होने का एहसास
करवा ही देते हैं.…

और किसी न किसी
रूप में बनी रहती
हैं ये यादें

रेवा

Wednesday, July 30, 2014

आकाश और धरती का प्यार


आज जब छत पर खड़ी
आकाश और धरती को
निहार रही थी ,
तो अचानक ख्याल आया
की कितने दूर हैं न दोनों
एक दूजे से ,
रोज़ टकटकी लगाये
देखते रहते हैं
एक दूजे को
पर मिल नहीं पाते .......
उनकी तड़प का
अंदाज़ा लगाना मुश्किल है ........
बाँहें फैलाये धरती
बस आकाश का ही
इंतज़ार करती रहती है........
और तड़प की हद
जब पार हो जाती है
तब होती है बरसात…....
आह ! कैसी
खिल उठती है न धरती
हरी चूनड़ ओढ़
फिर वो
तन - मन
से स्वागत करती है
अपने प्यार का..........


रेवा

Tuesday, July 29, 2014

ईद



आया दिन ईद का
चाँद दीद का
गले मिलो
खा लो मिठाई
दुआ करो
कभी हो न जुदा
हम हिन्दू मुस्लिम
भाई - भाई

रेवा 

Friday, July 25, 2014

बारिश की बूँदें



बारिश की बूँदें
प्रकृति का सौन्दर्य
दुगना कर देती है ,
सबका मन हर्षो उल्लास से
भर देती है ,
प्रेमी प्रेमिकाओं के लिए
तो ये बूंदें मानो
वरदान हो ,
पर यही बूँदें
मेरे मन को शीतल
करने की बजाय
अग्न क्यों पैदा
कर रही है,
हर एक गिरती
बूंद के साथ
मन और भारी क्यू हो रहा है ,
क्यों पंछियों की तरह
मैं भी खुश हो कर
दूर गगन मे
नहीं उड़ पा रही ,
वो भी तो अकेले
ही होते हैं हमेशा  ,  
फिर मैं क्यों नहीं ?
क्यों बरसात मुझे
किसी के साथ और
प्यार की जरूरत महसूस
कराता है ?

"ये आकाश से गिरते बूँदें हैं
 या मेरी आँखों के अश्क़
 ये आकाश प्यार बरसा रहा है
 या मेरा मन अपनी व्यथा "

रेवा

Tuesday, July 22, 2014

मुनिया



छोटी सी मुनिया
दिल मे डॉक्टर बनने
का अरमान लिए ,
बार-बार स्कूल के
दरवाजे जा खड़ी होती ,
डब-डबाई आँखों से
बस बच्चों को
पढ़ते हुए देखती
और लौट आती
पर पढ़ नहीं पाती ,
उस छोटी सी बच्ची
के कन्धों पर
घर सम्भालने की
जिम्मेदारी जो थी ,
भाई का पढ़ना
ज्यादा जरूरी था
बड़े होकर कमाना
तो उसे ही था ,
मुनिया तो लड़की है
घर के काम-काज़
सीखेगी तभी तो
ब्याह होगा उसका ,
पढ़ कर क्या करेगी ?
चूल्हा चौका करना
और बच्चे पलना
धर्म है उसका ,
न जाने कब पूरा होगा
मुनिया जैसी
गांव मे रेह रही
तमाम बच्चियों का सपना  ??

रेवा


Thursday, July 17, 2014

बंधन



लगने लगा था ऐसा कुछ
जैसे सारे बंधन
तोड़ लिए हैं तुमसे ,
अब कोई फर्क नहीं
पड़ता
बात हो या न हो ,
तुम्हारी सारी तकलीफें
अब तुम्हारी
मेरी सारी कठिनाइयाँ मेरी ,
तेरे सारे सपने तेरे अपने
और मेरे ख्वाब मेरे ,
फिर ऐसा क्यों होता है
एक दूसरे की याद
जाने अनजाने
दोनों की आँखें
नम कर जाती है ?
एक दूसरे के ख्वाबों मे
आना
अब भी क्यों जारी है ?
तुम्हारी तकलीफ भरी आवाज़
मुझे अब भी क्यों बेचैन कर जाती है ,
जब सरोकार ही नहीं
एक दूसरे से
फिर ये व्याकुलता क्यों ?

"कुछ बंधन बिना जोड़े
जुड़ जातें हैं
और टूट कर भी
जुड़े रहते हैं "


रेवा

Tuesday, July 15, 2014

महानायक


आज मैं  ऐसे इंसान पर कुछ लिखने की कोशिश कर रही हूँ
जिनपर न जाने कितने लोगों ने कितना कुछ लिखा और कहा
है ,ये मेरी एक छोटी सी अर्ज है की अगर कुछ त्रुटि हो जाये
तो मुझे छमा करें ……

जितना ऊँचा इनका कद है
उससे भी कहीं ज्यादा ऊँची सख्शियत हैं ये ,

अपने निभाए किरदारों मे
ये जितने ज्यादा सख्त हैं
असलियत मे उतने ही नर्म ,

इनका परिवार सिर्फ इनके
बीवी बच्चे ही नहीं
बल्कि पूरा विश्व है ,

किसी सभा की सुंदरता
उसकी सजावट से नहीं
बल्कि इनकी मौजूदगी से होती है ,

हमारे देश को  इनपर अभिमान है
पर इनमे लेश मात्र भी अभिमान नहीं ,

इंसान तो हर एक सेकण्ड मे पैदा होते हैं
पर इनके जैसा महानायक
सदी मे सिर्फ एक बार ,

हाँ ये और कोई नहीं बल्कि
हम सब के गुरुर श्री अमिताभ बच्चन जी हैं /

रेवा