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Wednesday, October 14, 2015

भिन्नरूप



शुरू हुए नवरात्र
आओ सब मिल पूजे
देवी शक्ति के
अनुपम रूप को  ,
युद्ध कर जिसने
किया संहार दानव स्वरुप को  .......

पर इस बार
चलो हम मनाये
इसके भिन्नरूप को    ,
युद्ध करें अपने अन्दर
के दानवों से
औ उजागर करें अपनी
दैवीय शक्ति प्रतिरूप को .......

अगर करें आज हम सब
ये प्रण
तो सार्थक होगा
अपना ये जीवन ………

शुभ नवरात्र


रेवा




Tuesday, September 29, 2015

क्या है मेरी पहचान ??



आज मन मे एक सवाल ने दस्तक दिया
क्या है मेरी पहचान ?

रसोई मे अच्छा खाना बनाना
और फिर तारीफ सुन खुश हो जाना ,
या मेरा व्यवस्थित घर
जिसे कभी अव्यवस्थित
रखने की गुंजाइश नहीं ,
या बच्चों की परवरिश
जो अब बड़े हो गए हैं
और अपनी दुनिया मे मस्त
क्या है मेरी पहचान ?

पति का घर लौटने का इंतज़ार
और उनका थका चेहरा जो
बिन बात किये
खा कर सो जाते है ,
या बच्चों की फटकार
उनके कमरे और पर्सनल
लाइफ से  बेदखली
क्या है मेरी पहचान ?

ससुराल मे मेरे उठाये गए
हर कदम पर प्रश्न
या घर की बचत पर
उठते सवाल
क्या है मेरी पहचान ?

मेरे मन का अंतर्नाद
या घर का वो कोना
जहाँ बैठ मैं करती हूँ
रात दिन खुद से
अनगिनत युद्ध
क्या है मेरी पहचान ??

रेवा



Wednesday, September 23, 2015

पापा आप बहुत याद आते हो



जब आप बीमार थे
तो कभी सोचा न था
युँ चले जाओगे
और चले गए तो
आप इतना याद आओगे .......

जब भी बचपन की कोई
भी बात कहीं भी होती है ,
जब भी घर आती हूँ
पापा आप बहुत याद आते हो.……… 

मेरे हर पसंद न पसंद
का ख्याल
आप रखते थे ,
कोई मुझे देख अनुमान नहीं
लगा पाता था की
परेशां हूँ
पर आप झट चेहरा पढ़ लेते थे
पापा आप बहुत याद आते हो ......…

कितना लाड़ और दुलारा दिया आपने
मम्मी को डांटा मेरे लिए
भइया को सजा वो भी मेरे लिए
कभी आपनेे हाँथ नहीं उठाया न
जोर से बोला मुझे
पापा आप बहुत याद आते हो .......

जब याद आते हो
तो आँखों के कोरों को
आंसुओं से भीगो लेती हूँ और
दिल की आह शब्दों
मे भर देती हूँ
पापा आप बहुत याद आते हो .....


रेवा

Monday, September 14, 2015

एक बड़ा सवाल ??



कैसा समय आ गया है
हमे याद रखना पड़ता है
और लोगों को भी
याद दिलाना पड़ता है की
हिन्दी हमारी मातृ भाषा है ,

हालात ये है की
साल के एक दिन हमे
हिन्दी दिवस मनाना पड़ता है
हिन्दी का स्थान और गरिमा
बना रहे इसके लिए अभियान
चलाना पड़ता है ,

बहुत दुखद है ये अवस्था
पर दोषी तो हम सभी हैं
अंग्रेजी मे बात करना अपनी
शान जो समझते हैं हम

जब हम ही ऐसा करते हैं
तो हमारे बच्चे भी यही करेंगे
फिर कैसे हम अपनी भाषा
से जोड़ पाएंगे आने वाली
नस्लों को ???

एक बड़ा सवाल ??

रेवा


Monday, August 31, 2015

तिरस्कार




मैं जानती हूँ जो 
खूबसूरती ढूंढती हैं 
तुम सब की नज़रें 
वो नहीं मिलती मुझ मे.....

पर क्या इस से तुम्हे 
मेरी अवहेलना करने का
हक़ मिल जाता है ?


या तो खुले आम कह दो
या मुझे आज़ाद कर दो

ऐसे रिश्तों से ....... 

नहीं सेह सकती मैं और
तिरस्कार उस बात के
लिए जिसमे मेरा कोई हाथ नहीं


ये भगवान की देंन है
किसी को ज्यादा किसी को कम

मैं जानती हूँ मेरा मन खुबसुरत है 
मैं प्यार और इज़्ज़त करती हूँ सबकी 
तो क्यों सहुँ मैं ये तिरस्कार ????


रेवा 

Thursday, August 27, 2015

~~~~~मन~~~~~



मन  इतनी जल्दी
कैसे भर लेता है
ऊँची उड़ान ,
हवा से भी तेज़
चलता है ,
एक पल मे
कितना कुछ जी लेता है
ख़ुशी, आँसूं  और
न जाने क्या क्या ,
कितना कुछ समां
रखा है अपने अंदर ,
जाने कितने दरवाज़े
खिड़कियाँ हैं उफ़ !!

कभी तो एक भी नहीं खुलती
पर कभी परत दर परत
उधड़ जाता है
ऊन के स्वेटर सा
और कर देता है खाली
खुद को ,
फिर भरने
नया आसमान !!

रेवा


Saturday, August 15, 2015

क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??






सर्व प्रथम स्वतंत्रता दिवस की ढेरो शुभकामनाएं सभी को !!!

अब कुछ सवाल ????

हमे स्वतंत्र हुए ६९ साल हो गए पर क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आतंकवाद इस कदर बढ़ रहा है की
देश खोखला होता जा रहा है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आज इंग्लिश बोलना अपनी शान और
हिन्दी मे वार्तालाप अपनी शान के खिलाफ
समझा जाता है ,
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आज हमारे देश की स्त्री कहीं
सुरक्षित नहीं ,
चाहे वो ५ साल की हो या ५० साल की
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

हमारे देश के बच्चे जो भविष्य हैं हमारा
बाल मजदूरी मे जकड़े हैं
आँखों मे सपने देखने से पहले
जुर्म देखते है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आधुनिकता हमे जकड़ती जा रही है
और संवेदनहीनता बढ़ती जा रही है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

ये सवाल यहीं खत्म नहीं होते और भी कई जटिल समस्याएँ हैं
एक दूसरे को बधाई देने से बेहतर हर स्वतंत्रता दिवस पर
कोई भी एक छोटा काम देश के नाम …………

रेवा