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Wednesday, May 22, 2013

तो क्या बात है

ज़माना ही बेवफ़ा है
तुमने बेवफ़ाई की तो
क्या बात है ,
दर्द तो ऐसे भी था सीने मे
तुमने दर्द दिया
तो क्या बात है ,
उपर से तो सभी छलनी करते हैं
तुमने दिल मे रह कर छला
तो क्या बात है ,
आंखें तो यूँ भी भर आती थी
तुमने उन्हें रोने का बहाना दे दिया
तो क्या बात है ,
तपती धुप मे बारिश सा एहसास देने वाले ने
बारिश के साथ रोना सिखा दिया
तो क्या बात है ,
तुम पर इन सारे इल्ज़ामो के बावजूद
मुझे तुमसे बेइन्तेहा प्यार है
तो क्या बात है /

रेवा


12 comments:

  1. क्या बात है
    क्या बात है
    बहुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति
    God Bless U

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (२३-०५-२०१३) को "ब्लॉग प्रसारण-४" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  3. प्यार के इज़हार का एक अनूठा इज़हार, जहाँ माँग नहीँ- अपेक्षा नहीँ- चाहत भी नहीँ. सिर्फ समर्पँ- हर हाल- हर परिस्थिति मेँ. वाह क्या खूबसूरत अन्दाज़ है रेवा जी. दिल से मुबारक़बाद.
    - डा. रघुनाथ मिश्र
    अधिवक्ता/ लेखक/ कवि/ शायर्

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  4. बेहतरीन अभिव्यक्ति .....

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  5. सच में क्या बात है ...:))

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  6. वाह....
    क्या बात है....
    दिल का हाल लिख डाला...

    सस्नेह
    अनु

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  7. ऐसा प्यार तो बड़ा खतरनाक है. बहुत अच्छा लिखा, बधाई.

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  8. अपने दिल में जो है ... उसपे तो बस नहीं होता ...
    प्यार होता है तो होता है ...

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  9. प्यार बस प्यार देखता है कौन क्या सोचता है क्या करता है यह नहीं देखता ...बहुत बढ़िया

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