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Sunday, May 5, 2013

कविता का संसार

गजब है ये कविता का संसार भी
रुलाता है , हँसाता  है 
अनेक तरह की
अनुभूतियाँ कराता है ,
कभी पढ़ कर लगता है 
ये पंक्तियाँ मेरे लिए ही
लिखी गयी  है ,
कभी लगता है काश 
ऐसा हम भी लिख पाते ,
कभी कभी तो
भाव इतने गहरे होते हैं की  
मन कुछ देर 
वहीँ गोता लगाता रहता है ,
और कभी 
सच मे आंसू बहने लगते हैं ,
पर जैसा भी है 
बहुत प्यारा है ये  संसार। 

रेवा 



12 comments:

  1. शब्दों का अजीब मायाजाल

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  2. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 08/05/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,आभार.

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  4. सच कहा आपने कभी-कभी तो यूँ लगता भी है यह तो मेरे लिए ही लिखा है .......बहुत सुन्दर

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  5. गजब है ये कविता का संसार और अजब भी - अति सुंदर

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  6. rewa yah laikhni ka sansaar sundar hai sachha hai bhavo ka jajbatao ka kahyalo ka sapno ka lafzo ka ...mujhe bahut pyara laga aapka bhi yah sansaar

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  7. खूबसूरत भावमयी अभिव्यक्ति
    God Bless U

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  8. कविता की आंतरिक अभिव्यक्ति का सार यही है
    मन का द्रवित होना या मंद मंद मुस्कराना
    बहुत सुंदर रचना बधाई

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  9. सच कहा रेवा...
    मन रम जाता है इस संसार में....

    सस्नेह
    अनु

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  10. कविता पर बहुत सुन्दर कविता पढ़कर बहुत अच्छा लगा ..

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  11. सच में कविता का संसार है ही सब से अलग...बहुत सुन्दर..

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