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Thursday, January 16, 2014

कोशिश




बहुत कोशिश की
तुझसे दुरी बनाने की
लेकिन हर कोशिश
नाकाम रही ,
लाख चाहा एक
औपचारिक रिश्ता
कायम करूँ  ,
पर जब भी तुम्हारी आवाज़ सुनी
सारे प्रयास बेमानी
लगने लगे ,
पता नहीं तुम्हारी
सखशियत ऐसी है
या तुम्हारा प्यार ऐसा है ?
शायद जब प्यार करना
अपने वश मे नहीं होता ,
तो दूर जाना भी
मुमकिन नहीं होता।

रेवा


15 comments:

  1. सही कहा आपने प्यार अपने वश में नहीं होता तो दूर जाना भी नहीं

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  2. कोमल, मधुर एवँ पीड़ा के अहसास से सिक्त सुंदर रचना !

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  3. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (17.01.2014) को "सपनों को मत रोको" (चर्चा मंच-1495) पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है,धन्यबाद।

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  4. Bahut sundar ehsaason se bharpoor kavita....jai ho

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  5. जहान प्यार हो वहाँ दूओरी कहाँ रह पाती है ... भाव पूर्ण ...

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  6. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मौसम है शायराना - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  7. duri tan se ho to ho lekin man se koi dur kaise jaye , bahut sundar

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  8. kalam ka jadu aur aapke shbd dono sundar ban padhe hai rewa ji

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