Followers

Friday, January 3, 2014

समय

ह्रदय और मन की
ये कैसी है संधि  ,
दोनों ने आपस मे 
कर ली है जुगलबंदी ,
समझ ने भी ऐलान 
कर दी है बंदी ,
आँखों ने ठान लिया है 
देगा उनका साथ ,
एहसासों ने भी 
मिलाया इनसे हाँथ ,
कोशिशे हो रही नाकाम 
लगता नहीं ये काम है आसान ,
मन तो होता रहेगा अधीर 
पर मुझे भी धरना होगा धीर ,
हालात कभी नहीं होते एक से 
हर समय होता है अस्थायी ,
बस यही बात अब 
मन मे आयी। 


रेवा 

11 comments:

  1. वाह ! बहुत सुंदर !

    ReplyDelete
  2. बहुत सही बात हालात और समय हमेशा एक से नहीं रहते..
    बहुत ही सुन्दर भाव अभिव्यक्ति...
    :-)

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर भाव

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति...!
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए...!
    RECENT POST -: नये साल का पहला दिन.

    ReplyDelete
  5. ये हुई न बात समझदारो वाली
    हार्दिक शुभकामनायें

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

    ReplyDelete
  7. super.....loved reading it Rewa..

    ReplyDelete
  8. aap sabka bahut bahut shukriya.....nav varsh mangalmay ho

    ReplyDelete
  9. .बेहतरीन भाव संयोजन।

    ReplyDelete