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Friday, January 24, 2014

दिल कि फितरत




जब दिल रोता है तो
लाख कोशिशों के
बावजूद ,
पलकों के शामियाने
को छोड़
आँसू छलक जातें हैं ,
दिल को कितना भी
समझा लो
पर हर बात उसे
नागवार गुजरती है ,
और वो
अपने एहसासो से
भिगोती रहती है
पलकों को ,
"क्युकी खुद को समझाना
हमारी आदत है ,
पर न समझना
दिल कि फितरत है" ।


रेवा 

16 comments:

  1. सकारात्मक भावों को बहुत अच्छे से व्यक्त किया है आपने ।
    सार्थक रचना ।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (25-1-2014) "क़दमों के निशां" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1503 पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  3. "क्यूंकि खुद को समझाना हमारी आदत है ,पर न समझना दिल की फितरत है " .....बहुत सुन्दर
    नई पोस्ट मेरी प्रियतमा आ !
    नई पोस्ट मौसम (शीत काल )

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  4. बहुत सुंदर........

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  5. लाजबाब बहना
    हार्दिक शुभकामनायें

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  6. भावो का सुन्दर समायोजन......

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  7. न समझना दिल की फितरत है.......

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