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Monday, January 6, 2014

क्या नाम दूँ ऐसे रिश्ते को ???




न कोई शिकवा है ,
न शिकायत
न नफ़रत है,
न मोहब्बत
न आशा है ,
न निराशा
न ख़ामोशी सुकूं देती है ,
न बातें
न आंसु दिल दुखाती हैं ,
न हंसी मन बहलाती है
न मिलन कि आस है ,
न जुदाई का गम
फिर भी जुड़े हैं एक दूजे से हम

क्या नाम दूँ ऐसे रिश्ते को ???

रेवा 

14 comments:

  1. रहने दो
    छोड़ो
    मत दो कोई नाम
    नाम दे देने से
    रिश्ता पराया हो जाता हैं
    मित्र
    रिश्तों पर से
    अधिकार न खींचो अपना

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    1. shukriya harish ji...vichar yogy baat kahi apne

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  2. तटस्थ
    मन को काबू में कर ली क्या छोटी बहना
    हार्दिक शुभकमनाएं

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  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  4. अनाम रिश्ता ,शायद उसके लिये कोई शब्द नहीं बना !
    नई पोस्ट सर्दी का मौसम!
    नई पोस्ट लघु कथा

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  5. बहुत खूब कई ऐसे रिश्ते होते हैं जिन्हें कोई नाम नहीं दिया जा सकता ..

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  6. एक गीत याद आ रहा है-'प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो'
    लाजवाब रचना...बहुत बहुत बधाई....

    नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो

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  7. भावो का सुन्दर समायोजन......

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  8. गहन अभिव्यक्ति.... सच कहती पंक्तियाँ

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