कल रात अचानक ही
बिन मौसम बरसात होने लगी ,
लैंपपोस्ट की रौशनी मे
बारिश की बूंदे
मोती की तरह प्रतीत हो रही थी ,
और टप - टप झर रही थी
मानो असमान धरती पर
अपना प्यार बरसा रहा हो ,
पेड़ भी झूम झूम कर
ख़ुशी माना रहे थे ,
बिजली भी चमक - चमक कर मानो
रात के अंधियारे को रौशन कर रही थी ,
मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू
मन को महका रही थी ,
और मैं बाल्कोनी मे खड़ी
इस प्रकृति के सुन्दर मंजर
को निहार कर
मंत्रमुग्ध हो रही थी ,
और सोच रही थी की
ये प्रकृति का मंजर
जीवन के कितने नज़दीक है ,
जीवन मे भी ऐसे ही अचानक
बहार आती है
और हम बस मंत्रमुग्ध से
उसमे खो जाते हैं /
रेवा
बिन मौसम बरसात होने लगी ,
लैंपपोस्ट की रौशनी मे
बारिश की बूंदे
मोती की तरह प्रतीत हो रही थी ,
और टप - टप झर रही थी
मानो असमान धरती पर
अपना प्यार बरसा रहा हो ,
पेड़ भी झूम झूम कर
ख़ुशी माना रहे थे ,
बिजली भी चमक - चमक कर मानो
रात के अंधियारे को रौशन कर रही थी ,
मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू
मन को महका रही थी ,
और मैं बाल्कोनी मे खड़ी
इस प्रकृति के सुन्दर मंजर
को निहार कर
मंत्रमुग्ध हो रही थी ,
और सोच रही थी की
ये प्रकृति का मंजर
जीवन के कितने नज़दीक है ,
जीवन मे भी ऐसे ही अचानक
बहार आती है
और हम बस मंत्रमुग्ध से
उसमे खो जाते हैं /
रेवा