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Friday, March 22, 2013

जीवन और प्रकृति

कल रात अचानक ही
बिन मौसम बरसात होने लगी ,
लैंपपोस्ट की रौशनी मे
बारिश की बूंदे
मोती की तरह प्रतीत हो रही थी  ,
और टप - टप झर रही थी
मानो असमान धरती पर
अपना प्यार बरसा रहा हो ,
पेड़ भी झूम झूम कर
ख़ुशी माना रहे थे ,
बिजली भी चमक - चमक कर मानो
रात के अंधियारे को रौशन कर रही थी ,
मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू
मन को महका रही थी ,
और मैं बाल्कोनी मे खड़ी
इस प्रकृति के सुन्दर मंजर
को निहार कर
मंत्रमुग्ध हो रही थी ,
और सोच रही थी की
ये प्रकृति का मंजर
जीवन के कितने नज़दीक है ,
जीवन मे भी ऐसे ही अचानक
बहार आती है
और हम बस मंत्रमुग्ध से
उसमे खो जाते हैं /

रेवा



Wednesday, March 20, 2013

शायरी जैसी लड़की

कितनी ही बार
तूने मुझसे एक अदद
साथी ढूढने की इल्तेज़ा
कि है
ऐसी जो तेरी शायरी
में छुपे एहसासों जैसी हो
जो तेरे अनकहे
अल्फाजों को पढ़ सके
जो शायरी के
हर शेर की खुशबु हो
जो उसमे  बयां
लड़की की तरह
बे इन्तेहाँ  प्यार करे तुझसे ,
पर क्या तुझे पता है की
ऐसी लड़की कहीं नहीं है
कहीं नहीं ,
क्यूंकि वो तो तेरी धड़कन
में बसी ,
तेरे कलम से शब्द बन कर
पन्नों पर बिखरी रहती है

रेवा




Monday, March 18, 2013

कैसे महसूस करे ?

हमेशा चाहा था उस चुलबुली लड़की ने की
कभी कोई उस पर भी कविता लिखे ,
जिसमे इतना प्यार झलकता हो
इतने गहरे एहसास हो
जितना उसकी आँखों मे भरा
रहता है ,
पर जब लिखा किसी ने
तब वो बस पढ़ ही पाई ,
उसमे भरे एहसासों को
महसूस न कर सकी ,
कैसे करती ?
वो दिलो जान से किसी और कि
जो हो चुकी थी /

रेवा

Wednesday, March 13, 2013

खास होने का एहसास

बात तो लगभग
रोज़ ही होती है तुमसे ,
पर कभी कभी ऐसी
कुछ बात हो जाती है की,
मन  मे एक अजीब सी हलचल
दिल मे गुदगुदी सी
होने लगती है ,
और तब लगता है
मैं हूँ
बिन पंख लगाये
मैं भी आकाश मे
उड़ने का अनुभव
कर सकती हूँ ,
खिली खिली धुप मे भी
सावन की पहली फुहार सा
महसूस कर सकती हूँ ,
ये सिर्फ किताबी बातें नहीं
"प्यार " सच मे हमे
खास होने का एहसास दिलाता है !

रेवा



Tuesday, March 12, 2013

मेरे जीने का आधार

हर रात 
जब मन दिन की उलझनों 
को भुला कर शांत होता है ,
और निंद्रा की गोद मे 
सामने को आतुर होता है  ,
तो पता नहीं कहाँ से 
दबे पाँव 
तेरी यादें दस्तक देने लगती है ,
और फिर 
मैं खुली आँखों से  
सपने देखते - देखते 
कब तेरी बाँहों मे समां 
जाती हूँ पता की नहीं चलता ,
तेरे साथ का ये एहसास 
तेरा प्यार 
यहीं तो है मेरे जीने का आधार 

रेवा 



Sunday, March 3, 2013

एक 'थी' छोटी सी मिनी

एक 'थी' छोटी सी मिनी
मस्त ,अल्हड़ ,हर वक़्त 
ठिठोली करती ,
बदमाशी की नयी-नयी 
योजनायें  बनाती ,
दीदी और माँ को पटा कर 
खेलने भाग जाती ,
बात बेबात भाई से झगडती 
दोस्तों को परेशान करती ,
खेल मे नक़ल कर
हमेशा जीत जाती , 
दुनिया की तमाम 
उलझनों से बेखबर ,
अपनी ही सपनो की दुनिया 
मे जीती ,
पर पता नहीं था उसे की 
सपनो मे और हकीकत मे 
कितना फासला है ,
आज उसे देख कर 
कोई नहीं बोलता की  
वो वही है ,
न हंसती न सपने 
देखती है ,
बस चुप चाप अपनी 
दुनिया मे कैद 
अपने फ़र्ज़ को निभाने 
की कोशिश करती है .....

रेवा 



Saturday, March 2, 2013

होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी

होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी 
अनकहे अनजाने से.......
बस बंध जातें है 
कभी जाने कभी अनजाने  
ख़ुशी कम देते है 
गम देतें हैं ज्यादा ,
होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी 
अनकहे अनजाने से .......
जब जब मिलते हैं 
न कर पातें हैं बातें 
आँखों मे बरबस आँसू दे जातें है 
वो मुलाकातें ,
होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी 
अनकहे अनजाने से .......
दुखी होते हैं हर बार 
फिर भी तडपते है ,
एक आवाज़ 
एक मुलाकात को ,
होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी 
अनकहे अनजाने से .......
बस मे होता तो छोड़ देते साथ 
पर जाने क्यों 
मजबूर हैं ,कर बैठते हैं वादें ,
होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी 
अनकहे अनजाने से .....



रेवा