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Tuesday, March 12, 2013

मेरे जीने का आधार

हर रात 
जब मन दिन की उलझनों 
को भुला कर शांत होता है ,
और निंद्रा की गोद मे 
सामने को आतुर होता है  ,
तो पता नहीं कहाँ से 
दबे पाँव 
तेरी यादें दस्तक देने लगती है ,
और फिर 
मैं खुली आँखों से  
सपने देखते - देखते 
कब तेरी बाँहों मे समां 
जाती हूँ पता की नहीं चलता ,
तेरे साथ का ये एहसास 
तेरा प्यार 
यहीं तो है मेरे जीने का आधार 

रेवा 



15 comments:

  1. तेरा प्यार
    यहीं तो है मेरे जीने का आधार !!

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  2. बहुत ही सुन्दर कविता,आभार.

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  3. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

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    Replies
    1. Rajneeshji shukriya....jaroor bhejungi

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  4. भावनाओ से ओत -पोत बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

    आप मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

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  5. बहुत खूबसूरत अहसास लिए हुए है आपकी रचना ....

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  6. बढ़िया भाव-
    आभार आदरेया-

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  7. बहुत सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुतिकरण एक गहरे अर्थ के साथ-----बधाई

    मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों----आग्रह है
    jyoti-khare.blogspot.in







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  8. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (13-03-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  9. सादर जन सधारण सुचना आपके सहयोग की जरुरत
    साहित्य के नाम की लड़ाई (क्या आप हमारे साथ हैं )साहित्य के नाम की लड़ाई (क्या आप हमारे साथ हैं )

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  10. सुंदर भावपूर्ण कविता रेवा जी. बधाई इस बढ़िया प्रस्तुति के लिये.

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  11. bohut khub......satyajit

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  12. सुन्दर रचना. बधाई रेवा.
    डा. रघुनाथ् मिश्र्

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  13. pyar ka ehsaas nhi hota sabhi ke pass ..bahut badiya mere dost bahut badiya

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