कैसा समय आ गया है
हमे याद रखना पड़ता है
और लोगों को भी
याद दिलाना पड़ता है की
हिन्दी हमारी मातृ भाषा है ,
हालात ये है की
साल के एक दिन हमे
हिन्दी दिवस मनाना पड़ता है
हिन्दी का स्थान और गरिमा
बना रहे इसके लिए अभियान
चलाना पड़ता है ,
बहुत दुखद है ये अवस्था
पर दोषी तो हम सभी हैं
अंग्रेजी मे बात करना अपनी
शान जो समझते हैं हम
जब हम ही ऐसा करते हैं
तो हमारे बच्चे भी यही करेंगे
फिर कैसे हम अपनी भाषा
से जोड़ पाएंगे आने वाली
नस्लों को ???
एक बड़ा सवाल ??
रेवा

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