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Monday, September 14, 2015

एक बड़ा सवाल ??



कैसा समय आ गया है
हमे याद रखना पड़ता है
और लोगों को भी
याद दिलाना पड़ता है की
हिन्दी हमारी मातृ भाषा है ,

हालात ये है की
साल के एक दिन हमे
हिन्दी दिवस मनाना पड़ता है
हिन्दी का स्थान और गरिमा
बना रहे इसके लिए अभियान
चलाना पड़ता है ,

बहुत दुखद है ये अवस्था
पर दोषी तो हम सभी हैं
अंग्रेजी मे बात करना अपनी
शान जो समझते हैं हम

जब हम ही ऐसा करते हैं
तो हमारे बच्चे भी यही करेंगे
फिर कैसे हम अपनी भाषा
से जोड़ पाएंगे आने वाली
नस्लों को ???

एक बड़ा सवाल ??

रेवा


Monday, August 31, 2015

तिरस्कार




मैं जानती हूँ जो 
खूबसूरती ढूंढती हैं 
तुम सब की नज़रें 
वो नहीं मिलती मुझ मे.....

पर क्या इस से तुम्हे 
मेरी अवहेलना करने का
हक़ मिल जाता है ?


या तो खुले आम कह दो
या मुझे आज़ाद कर दो

ऐसे रिश्तों से ....... 

नहीं सेह सकती मैं और
तिरस्कार उस बात के
लिए जिसमे मेरा कोई हाथ नहीं


ये भगवान की देंन है
किसी को ज्यादा किसी को कम

मैं जानती हूँ मेरा मन खुबसुरत है 
मैं प्यार और इज़्ज़त करती हूँ सबकी 
तो क्यों सहुँ मैं ये तिरस्कार ????


रेवा 

Thursday, August 27, 2015

~~~~~मन~~~~~



मन  इतनी जल्दी
कैसे भर लेता है
ऊँची उड़ान ,
हवा से भी तेज़
चलता है ,
एक पल मे
कितना कुछ जी लेता है
ख़ुशी, आँसूं  और
न जाने क्या क्या ,
कितना कुछ समां
रखा है अपने अंदर ,
जाने कितने दरवाज़े
खिड़कियाँ हैं उफ़ !!

कभी तो एक भी नहीं खुलती
पर कभी परत दर परत
उधड़ जाता है
ऊन के स्वेटर सा
और कर देता है खाली
खुद को ,
फिर भरने
नया आसमान !!

रेवा


Saturday, August 15, 2015

क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??






सर्व प्रथम स्वतंत्रता दिवस की ढेरो शुभकामनाएं सभी को !!!

अब कुछ सवाल ????

हमे स्वतंत्र हुए ६९ साल हो गए पर क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आतंकवाद इस कदर बढ़ रहा है की
देश खोखला होता जा रहा है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आज इंग्लिश बोलना अपनी शान और
हिन्दी मे वार्तालाप अपनी शान के खिलाफ
समझा जाता है ,
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आज हमारे देश की स्त्री कहीं
सुरक्षित नहीं ,
चाहे वो ५ साल की हो या ५० साल की
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

हमारे देश के बच्चे जो भविष्य हैं हमारा
बाल मजदूरी मे जकड़े हैं
आँखों मे सपने देखने से पहले
जुर्म देखते है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

आधुनिकता हमे जकड़ती जा रही है
और संवेदनहीनता बढ़ती जा रही है
क्या हम सच मे स्वतंत्र हैं ??

ये सवाल यहीं खत्म नहीं होते और भी कई जटिल समस्याएँ हैं
एक दूसरे को बधाई देने से बेहतर हर स्वतंत्रता दिवस पर
कोई भी एक छोटा काम देश के नाम …………

रेवा 

Friday, July 31, 2015

तुम्हारे बिना


तुम्हे क्या लगता है
मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता
आराम से रह लेती हूँ
तुम्हारे बिना ??
वहीँ घर के काम
खाना पीना और सोना ………

ये क्यों नहीं समझते की
जब तक सुबह तुम्हारे साथ
दो कौर खा न लूँ
मेरा मन भूखा रहता है ..........

शाम को जब तुम घर आते हो
तो खाली घर भर जाता है ,
तुम्हारी आवाज़ सुनकर
सन्तुष्टि सी महसुस होती है .......

बात तुम चाहे न करो
पर बगल मे तुम्हे सोया देख कर
मेरी नींद पूरी हो जाती है……

ऐसा महसुस होता है की
"तुम मेरी आदत और आदत
ज़िन्दगी बन गयी है अब "!!!!

रेवा 

Wednesday, July 22, 2015

बेमानी प्यार





जाने क्यों
पर भटकती रही
सदा प्यार के लिए….

प्यार नज़र भी आया
पर हंसी आई ये जान कर की
प्यार भी सहुलियत के हिसाब से
किया जाता है …

फ्री हैं तो प्यार जाता दिया
मसरूफ हुए तो ठुकरा दिया
उफ्फ्फ !!

जब ज़िन्दगी मे
खालीपन महसूस हुआ
तो याद आया फिर वही प्यार ....

और उस प्यार को वहां न पा कर
बेवफा और न जाने
क्या क्या उपनाम दिया....
वाह !

खुद को सच्चा
और प्यार को बदनाम किया …
हुँह !

"खुद हुए मसरूफ
और बेवफ़ा  मुझे नाम दिया ,
चल दिए दामन छुड़ा कर
और बेमानी मेरा प्यार हुआ  "!!!!!!!

रेवा

Monday, July 13, 2015

अनकही जुबां !!



बेवफाई ने तेरी
कर दिया बेजुबां ,
हर तन्हा लम्हे से
करती हूँ मैं बस
एक ही सवाल ,
क्या मैं प्यार के
क़ाबिल नहीं ?
या किस्मत ही है
बईमा ,
या पल पल की तड़प
नाम है मेरे ,
काश ! तुम समझ पाते
मेरे नम आँखों की जुबां ,
पढ़ पाते
मेरी दर्द भरी मुस्कान ,
पर अब भी मेरे पास
जीने की है एक वजह
मेरे दिल मे बसे
तेरे प्यार की वो
अनकही जुबां !!

रेवा