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Tuesday, January 21, 2020

बुक मार्क








उस रात मैं किताब पढ़ 
रही थी 
एक पन्ने पर आ कर 
ठहर गयी 
आगे बढ़ ही नहीं पाई 
बुक मार्क लगाया और 
सो गई 

उस पन्ने का हर शब्द 
हमारे इश्क़ को 
बयां कर रहा था 
जिसे पढ़ कर 
तुम्हारी याद 
बेतरह आने लगी 
बताओ ज़रा तुम्हारी 
यादों से आगे कैसे बढ़ जाऊँ 
कैसे यादों से भरे उस 
पन्ने को पलट दूं 

वो बुक मार्क लगी किताब 
आज भी उसी तरह 
पड़ी है मेरे साइड टेबल पर 
और तुम्हारी याद वैसे ही 
हमारे मिलने के तारीखों 
के बुक मार्क के साथ मेरे 
दिल पर....

#रेवा

Thursday, January 9, 2020

संतोष




जब मन उदास होता है
और तुम्हारा साथ नहीं
मिलता
तो तुम्हारे लिखे शब्द
पढ़ लेती हूँ

हर बार उन्हें पढ़ कर
चेहरे पर मुस्कुराहट
तैर जाती है
संतोष से भर उठता है मन
के दुनिया के एक कोने में
कोई है जो मुझे मुझसे बेहतर
जानता है
जो हर बार कुछ ऐसा महसूस
कराता है की जिंदगी से
प्यार हो जाता है
जिसका प्यार मुझे कमज़ोर
कतई नहीं करता
बल्कि
दोगुनी ताक़त से भर देता है
जानते हो
दुनिया कैसी भी हो
पर जब तक तुम जैसे
प्यार करने
वाले इंसान ज़िंदा है
दुनिया में अच्छाई और
इंसानियत कायम
रहेगी

रेवा 

Friday, January 3, 2020

नियंत्रण


गृहस्थी में भी और जिंदगी में भी अक्सर देखा गया है, नियंत्रित होने वाला और नियंत्रण करने वाला इन दोनों का जीने का एक तरीका बन जाता है।
पर ये भी तो एक चक्र की तरह है न जब सालों बाद, यही उल्टा होता है तो रिश्ते में कड़वाहट आने लगती है। क्योंकि नियंत्रण करने वाले को आदत जो है अपने तरीके से नियंत्रण करने की।
पर अब नियंत्रित होने वाला उसे और ले नहीं पाता और विद्रोह कर देता है। मन से नियंत्रण करने वाले का बुरा न चाहते हुए भी हर बार चोट करता है और सुकून महसूस करता है।
रिश्ते टूट जाते हैं या फिर ख़ामोश हो जाते हैं,
पर नियंत्रण करने वाले का बदलना नामुमकिन सा लगता है। चाहे वो नियंत्रित करने वाले को
प्यार ही क्यों न करता हो, उसका अहम उसे बदलने से रोकता है और सुंदर रिश्ते की मौत तब निश्चित हो जाती है।

#रेवा

Tuesday, December 10, 2019

सोच




कभी कभी लगता है
जैसे मैं धंसती जा
रही हूँ अंधेरे कुएँ में
चाहती हूं बाहर निकलना
पर निकल नहीं पाती
कभी रोती हूँ अपने
हाल पर
पर दूसरे ही पल
मुस्कुरा देती हूँ
ये सोच कर की
रोने से क्या होगा
लेकिन फिर भी
कुछ बदल नहीं पाती
और फिर
निराशा घेर लेती है
चारों ओर से
मेरी सोच किसी
निर्णय पर पहुंच नहीं पाती
और मैं पड़ी रह जाती हूँ
उसी अंधेरे गहरे कुएँ में

Thursday, October 10, 2019

नमी





जैसे जैसे बारिश की बूंदें
मिट्टी पर गिरती हैं
मिट्टी नमी सोखने लगती है
बारिश जब ज्यादा हो जाये तो
मिट्टी की सतह उसे और
सोख नहीं पाती और
पानी इकट्ठा हो जाता है या
बहने लगता है
मेरा मन भी उसी मिट्टी की
तरह है
कड़वाहट की बारिश
झेल लेता है पर ज्यादा हो तो
अक्सर आँखों के रास्ते
बहने लगता है

Sunday, September 29, 2019

खाली स्थान भरो






बचपन में हमने
खूब किया है न ये
परीक्षा में, होमवर्क में
क्लासवर्क में
"खाली स्थान भरो"

सही हो या गलत
हम इस सवाल को
पूरा करते ही थे
समय आभाव में
ही इसे छोड़ते थे

रिश्ते भी ऐसे ही
होते हैं
रिश्तों में कभी
गर खाली स्थान
रह गया तो
सही हो या गलत
कोई न कोई
भर ही देता है

कभी कभी
वैसे ही
रह भी जाता है
सही हो गया तो
ठीक ही है
पर अगर गलत हुआ
तो पूरा रिश्ता बिगड़
जाता है और उसके
साथ जुड़े न जाने
कितने रिश्ते
और गर खाली ही
रह गया तो
ताउम्र अधूरे
रिश्ते को निभाते
रहते हैं हम

#रेवा
#रिश्ता

Wednesday, August 28, 2019

जरुरत



मुझे जब तुम्हारी जरूरत थी
जब मैं टूटने लगी थी
जगह जगह दरारें पड़ने लगी थी
तुम देख कर समझ न पाए

मैंने तुम्हें आवाज़ लगाई
एक बार दो बार नहीं
कई कई बार
पर हर बार अपनी
उलझनों में उलझे तुम्हें
मैं, मेरे एहसास जरूरी न लगे

पर मैं टूटी नहीं बिखरी नहीं
ख़ुद को समेटा अपनी दरारों को
भर तो न पाई पर उन्हें इस तरह
से ढका की वो खूबसूरत दिखने लगी
और मैं उनके साथ जीने लगी

आज अचानक तुम्हें मेरा ख्याल आया
तुम आये मेरे पास
पर अब मैं तुम्हें फिर से इज़ाज़त
नहीं दे पाऊँगी की तुम
उन दरारों को फिर से बदसूरत
दर्द भरा कर दो और फिर
डूब जाओ अपनी उलझनों में

मैं खुश हूँ उनके साथ अपने साथ
मुझे वैसे ही रहने दो..