रही थी
एक पन्ने पर आ कर
ठहर गयी
आगे बढ़ ही नहीं पाई
बुक मार्क लगाया और
सो गई
उस पन्ने का हर शब्द
हमारे इश्क़ को
बयां कर रहा था
जिसे पढ़ कर
तुम्हारी याद
बेतरह आने लगी
बताओ ज़रा तुम्हारी
यादों से आगे कैसे बढ़ जाऊँ
कैसे यादों से भरे उस
पन्ने को पलट दूं
वो बुक मार्क लगी किताब
आज भी उसी तरह
पड़ी है मेरे साइड टेबल पर
और तुम्हारी याद वैसे ही
हमारे मिलने के तारीखों
के बुक मार्क के साथ मेरे
दिल पर....
#रेवा


