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Tuesday, May 12, 2015

नारी




नारी

माँ बहन बेटी पत्नी दोस्त
और भी कई रूप
पर दिखता क्यों बस
हाड़ मास का देह स्वरुप ,
प्यार वात्सल्य से भरी
इस मूरत मे
क्यों दीखता है
काम ,वासना का ही रूप ,
बोलने को कर लेते हैं सब
बड़ी बड़ी बातें
और बनते हैं परम पुरुष,
पर मन के अंदर
वहीँ लालसा ,वो ही
लपलपाती लार टपकती
इच्छायें लिए घूमते हैं ,
इंतज़ार मे की कब मौका
मिले और भूख शांत हो ..........
"अगर ये दुनिया ऐसी है
तो हमे दुगनी शक्ति से
भर दो माँ
ताकी आने वाली बेटियों को
हम सब मिल कर 
भय मुक्त समाज दे सके !!


रेवा



Monday, May 11, 2015

मुनिया (लघु कथा )



सोमारी झारखण्ड मे रहने वाली एक आम औरत……पिछले ३ महीनो से लड़ाई लड़ रही थी।अपनी बच्ची को स्कूल मे पढ़ाना चाहती थी , घर वालों की और पति की मनाही के बावजूद , अपने समुदाय से लड़ कर उसने अपनी मुनिया का दाखिला स्कूल मे करवा दिया.... ताकि वो पढ़ सके और उसकी तरह बिना पढ़े जमीन के कागज़ पर अंगूठा लगा कर सारी ज़िन्दगी एक बंधवा मजदुर न बन जाये।
आज मुनिया को गोद मे लिए लालटेन की रौशनी मे भी उसे मुनिया के उज्जवल भविष्य का चढ़ता सूरज नज़र आ रहा था।

रेवा 

Tuesday, May 5, 2015

बेमानी



ज़ुबान पर नाम तो तेरा अब भी आता है
पर जाने क्यूँ ये लब खामोश रहते हैं ,

प्यार तो तुझ पर अब भी आता है
पर जाने क्यूँ ये दिल बेवफाई की चादर ओढ़ लेता है ,

ख्वाबों में तेरा अक्स अब भी नज़र आता है
पर जाने क्यूँ ये नज़रों का धोखा लगता है ,

आदत सी हो गयी है यूँ जज़्बातों को कुचलने की
जाने क्यूँ ये प्यार अब बेमानी सा लगता है।

रेवा

Friday, April 24, 2015

सिर्फ तुम


रात की खामोशियों मे
चाँद की करवटों मे
चादर की सलवटों मे
मन की कसमसाहट मे
तकिये के गीले गिलाफ मे
दर्द भरे इस दिल मे
तुम सिर्फ तुम ही तो हो

रेवा 

Tuesday, April 7, 2015

गिद्ध




आज फिर मेरा
विश्वाश नोचा गया ,
ये नोच खसोट 
करने वाला गिद्ध 
और कोई नहीं 
बल्कि प्यार नामक 
शब्द का उपयोग 
करने वाला इंसान है ,
हँसी ! आती है 
प्यार का नगाड़ा 
बड़े जोर से बजाते है 
पर उनकी नज़र 
रहती है सिर्फ 
स्त्री की देह मे ,
"माटी से बना देह 
मिल जाएगा माटी मे 
उसे इतना मत नोचो की 
अपनी ही देह से घृणा हो जाये"। 


रेवा 


Friday, March 27, 2015

                                            
                                               सरस काव्य-गोष्ठी (कोलकाता )


मुझे ये बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है की , कोलकाता की संस्था "बंगीय हिन्दी परिषद" ने 22.3.15 रविवार 

को कवि-कल्प के तत्वावधान मे एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया।  

इस ऐतिहासिक संस्था को बड़े-बड़े साहित्यकार जैसे महादेवी वर्मा ,हरिवंश राय बच्चन ,निराला जी 

ने अपने पद्चिन्हों से नवाज़ा है। 

मुझे बहुत ख़ुशी महसूस होती है की मुझे इस संस्था से जुड़ने का मौका मिला ,और  मैंने अपने काव्य पाठ 

का सफर यहाँ से शुरू किया। जिसके लिए मैं रवि प्रताप जी ,नीलिमा दीदी और मेरी सखी आशा पाण्डेय 

की सदा आभारी रहूंगी। 

अपने अनुभव के बारे मे क्या बताऊ ……… वहां अनेक दिग्गज शायर , कवियों और कवित्रियों को सुनने 

का मौका मिला , उनकी सोच और उनके कलम को सलाम ,ऐसा लग रहा था मानो वो शाम काव्य रस से 


सरोबार हो गयी हो , कहाँ समय बीता पता ही नहीं चला। 

इस काव्य गोष्ठी के सफलता की खबर प्रभात खबर , दैनिक जागरण ,जनसत्ता ,राजस्थान पत्रिका और 

अनेक अकबरों ने छापी। 


रेवा 

प्रभात खबर 
दैनिक जागरण

Monday, March 23, 2015

अपनी पहचान..........


नहीं चाहिये मुझे
तुम ,तुम और तुम 
नही मानूँगी अब मैं 
सबकी बात ,
सिर्फ़ इसलिए की मुझे 
कहलाना है 
एक अच्छी बहु 
ननद ,भाभी और 
वो तमाम ऐसे रिश्ते 
जो बस चुप रहकर 
सुनने और सही 
होते हुए भी अपेक्छा न 
करने से मिलते  है  ,
अब मुझे भी चाहिए 
अपना आत्मसम्मान 
अपने काम और बातों 
मे  आत्मसंतुष्टि ,
और अपनी पहचान.......... 

रेवा