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Saturday, August 4, 2018

परदेस





चले तो गए हो तुम परदेस
पर बहुत कुछ
छोड़ गए हो
जाते-जाते

कल जब तुमने सवाल किया
मेरे बिना अकेलापन सालता होगा न ??
तो मैंने कुछ नहीं कहा
कैसे कह देती मैं अकेली हूँ....

तुमने
कमरे के हर कोने मे
अपना प्यार ..... 


चाय के कप मे
अपनी गर्माहट ....... 


आईने मे
अपना अक्स ...... 


कपड़ों मे
अपनी खुश्बू और....... 


मेरे कन्धों  पर
अपने तमाम एहसास...... 


सब तो मेरे पास ही छोड़ दिया 

अब कहो तो
मैं अकेली कहाँ हूँ. ......... 

#रेवा

14 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (05-08-2018) को "धोखा अपने साथ न कर" (चर्चा अंक-3054) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 05 अगस्त 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. अकेले में साथ निरंतर बना रहता है यही तो प्यार है, फिर भी दूरियां अखरती तो हैं ही ...........
    बहुत अच्छी रचना

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    1. जी सही कहा ....शुक्रिया

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  5. Sanjay Sachdeva LucknowAugust 4, 2018 at 7:11 PM

    आप इतना संजीदा लिखते हो कि बार बार पढ़ने का मन करता है ....

    शुभकामनायें आपको

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    Replies
    1. आपका आभार संजय जी

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