प्यार शब्द खुद मे इतना प्यारा है की इसे किसी परिभाषा की ज़रूरत नहीं ……ये एक एहसास है जो बस महसूस किया जा सकता है,पर इसके साथ ये भी सच है की प्यार की बड़ी बड़ी बातें सभी लोग कर लेते है……पर सच्चा प्यार बहुत कम लोगों के नसीब मे होता है……ये भी माना के प्यार दर्द भी देता है पर अगर ये सच्चा है तो संतुष्टि भी देता है…ऐसा प्यार हमे प्रभु के और करीब ले जाता है …ये मेरी भावनाएं और एहसास , इन्हीं को शब्द देने की कोशिश है मेरी …....
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Thursday, February 29, 2024
न्यूरो डिसऑर्डर
Tuesday, October 10, 2023
पहला प्यार
Sunday, January 2, 2022
खर्च
मैं जब रूठूं तो
मना लेना मुझे
मैं जब जीवन से
हार मानने लगूं
तो जिंदगी पर
फिर से भरोसा
दिला देना मुझे
मैं जब अपने से
परेशान हो कर
सबसे दूर हो जाऊं
तो पास बुला लेना मुझे
मैं जब तकलीफों से
त्रस्त हो आंसुओं में
भीगने लगूं
तो अपने साथ होने का
एहसास दिला देना मुझे
Friday, December 24, 2021
माघ की मेहँदी
प्रथा है कि
सुहागनें कोई भी
व्रत उपवास करने से पहले
हाथों में मेहँदी सजाती है,
मुझे ये समझ नहीं आता था
हर बार माँ से
एक ही सवाल
ऐसा क्यों ?
नहीं लगाया तो क्या होगा ?
अपनी बारी आई और
हाथों में
तेरे नाम की मेहँदी लगायी
तो समझ आयी
माँ की सारी अनकही बात,
जो रंग चढ़ाया वो
बिलकुल तेरे प्यार की तरह था,
कहीं रंग कम
कहीं ज्यादा
कहीं मिला जुला
कहीं एकदम फीका
पर पूरी हथेली
और उँगली
जैसे खिल गयी हो
मेहंदी के रंग से
और जब तुमने
Thursday, January 7, 2021
प्रेम
Thursday, October 22, 2020
ताउम्र
क्या आप रहने वाले हैं
हमेशा के लिए यहां
नहीं ना
तो फिर इतनी चिंता किस
बात की
अरे खुल कर जियो
मौज में रहो
चार पैसे कम कमा लोगे
तो कुछ न बिगड़ेगा
कौन सा साथ लेकर
जाना है
जितनी जरूरत है उतना
कमाओ
मशहूर न हुए न सही
ऊपर कोई नहीं पूछने वाला
लेकिन सोचो
इन सब की वजह से
अगर ज़िन्दगी न जिया
तो वो न मिलने की दोबारा
ये बस इसी बार है
तो जी लो खुल कर
प्यार करो दिल भर कर
दोस्त बनाओ जी भर कर
मस्ती करो
और चैन से रहो
क्योंकि तुम हमेशा
नहीं रहने वाले यहां
#रेवा
Friday, August 28, 2020
ओहदा
पर ये तस्सली भी है
कि जितना कुछ
हासिल किया अपने दम
पर हासिल किया
कभी किसी का सीढ़ी
की तरह इस्तेमाल नहीं किया
मैं जानती हूँ
चुटकियों की बात होगी
पर मैं संतुष्ट हूँ ख़ुद से
और यही संतुष्टि हर किसी के
बस की बात नहीं
आपका ओहदा आपकी बुलंदी
आपको बहुत मुबारक
मेरी संतुष्टि मुझे प्यारी है
हाँ एक बात और कहना चाहती हूँ
मुझसे जब भी मिलें
अपने ओहदे की पैरहन
उतार के मिले
क्योंकि मैं मुलाकात
इन्सान से करना पसंद करती हूँ
Tuesday, June 16, 2020
limelight
बहुत चमकदार है
जो भी इसके पास आता है
वो चमक जाता है
सूरज की रौशनी
की तरह
और अपनी एक पहचान
बना लेता है
इस लाइट के और भी
कई गुण हैं
ये धीरे धीरे
ज़मीन से उठा कर
आसमान पर बैठा देता है
इंसान खुद को भगवान तो नहीं
पर ऊँचे सिंहासन पर
बैठा हुआ महसूस करता है
कभी जो नज़रे पड़े उन पर तो
उनका चमकता पर
इतराता हुआ चेहरा
साफ दिख जाता है
लेकिन हो भी क्यों न
मेहनत भी तो की है
यहां तक पहुंचने में....
अब ज़मीन से ऊपर उठ गए हैं
तो ज़ाहिर है नीचे की चीज़ें
मुश्किल से दिखाई देंगी
और इस वजह से
इनका सारी ज़मीनी हकीकतों से
नाता टूट जाता है
अब गर आसमान में रहना है
तो इतनी सी कीमत तो
देनी ही पड़ेगी !!
दुःख की एक बात और है
ये समय के साथ अकेले हो जाते हैं
दोस्तों और सच से दूर,
मुखौटा लगाना इनकी
जरूरत बन जाती है
पर मुखौटा लगाते लगाते उसी
में रहने की आदत हो जाती है
और फिर लोग भी उन्हे वैसे ही
मिलने लगते हैं,
पाने की चाह में
उनके अंदर की रौशनी कम होने
लगती है
ये कहना गलत न होगा की
दुःख की पहरन पहन कर
जीते रहते हैं
और कभी कभी थक कर
खुद से आज़ाद
हो जाते हैं!!!
#रेवा
Sunday, June 14, 2020
दोपहर
कुछ सुकून के लम्हों से
मुलाकात हुई,
खुद में सिमटी
अधलेटी सी पड़ी थी मैं,
बाहर बरसात अपने
पूरे जोश में
बरस रही थी,
मेरे पास ही फ़ोन पर
गुलज़ार साहब के
लिखे गाने चल रहे थे,
मेरा मन न जाने क्यों
अजीब सा हो रहा था,
ऐसा जैसे मैं कहीं
डूब रही हूँ
ग़म तो कुछ भी नहीं
फिर भी जाने क्यों ????
समझ ही नहीं आया ....
अनायास ही एक बूँद
मेरे गालों को गीला
कर गयी
और मैं तेरी याद में
बुरी तरह भीग गयी,
पर जानते हो....
खुद को सुखाने का
बिलकुल मन था,
लग रहा था
बरसात यूँ ही होती रहे
और मैं यूं ही भीगती रहूँ !!!
रेवा
Friday, June 5, 2020
पेड़ और प्रकृति
बीज की कोख़
में रहते हैं
तमाम पेड़ पौधे
जब बड़े होते है
परिवार बढ़ता है उनका
फूल,पत्ते, टहनियाँ,फल......
अलग होते हैं
ये हमसे कुछ बोलते नहीं
बल्कि खुशी खुशी
हमे दे देते हैं
जब पत्ते पीले होकर
झड़ जाते हैं
तब भी चुप रहते हैं...
इन्हे आस होती है
कि नए फूल पत्ते
फिर खिलेंगे
पेड़ों को ही काट
देते हैं
तब इंतक़ाम लेते हैं
पेड़ों के जन्म दाता
यानी ये प्रकृति
जो हम झेलते हैं
तूफान, बाढ़, सूखा
मौसम में अचानक बदलाव
और अनेक बिमारियों के
रूप में ...
क्या अच्छा न हो की
हम सजग हो जाएं
अपनी प्रकृति
और अपने इन जीवनदायिनी
बंधुओं का ख्याल रखे ...
रेवा
Tuesday, June 2, 2020
टैग
Thursday, May 28, 2020
हमारे सच्चे दोस्त
Tuesday, May 19, 2020
कैलक्यूलेटर
कहाँ कितना किसे घटाना है
और कहाँ बढ़ाना
कहाँ गुना किया जा सकता है
और कहाँ विभाजित
तो बोलो
Friday, April 17, 2020
अनुवाद
Thursday, April 9, 2020
प्रेम
भाइयों और बहनों के
गीतों में सुना तुम्हें,
पर....कैसे ??
कहता है
पर दिल मानना नहीं चाहता !!!
#रेवा
Tuesday, March 31, 2020
स्त्री मन
Sunday, March 29, 2020
बदचलन औरत
मैं वो औरत हूँ
जिसने की है
एक मर्द से दोस्ती
जिसमें पाया है मैंने
अच्छा पक्का दोस्त
जिसे मैं अपने दिल की
हर बात साझा कर
सकती हूँ
जो मुझे समझता है
हर तकलीफ़ में साथ
खड़ा रहता है
मैं जैसी हूँ उसके लिए
एकदम परफेक्ट हूँ
हाँ गलतियों में डांट
भी देता है
कभी पिता सा लाड़ करता है
कभी प्रेमी सी बातें
तो कभी दोस्त बन कर
सलाह देता है
उसे मैं हमेशा
अपना कंधा कहती हूँ
पर वो मेरा पति
नहीं है न दूर दूर तक
कोई रिश्ता है उससे
फिर भी वो सबसे करीब है
हाँ शायद मैं बदचलन
औरत हूँ
या बेबाक या मोर्डरन
जमाने की बिगड़ी हुई
औरत या फिर
मैं जैसा
कहती हूँ इंसान हूँ
और इंसान से की है
दोस्ती और रिश्ता
इंसानियत का है
#रेवा
Friday, March 20, 2020
डरपोक औरतें
अनेकों घृणित नामों से
उसे नवाज़ते हैं
तो कभी बदचलन
सोचती हूँ मैं
अगर मर्द होते ही नहीं
तो इन नामों का
कोई मतलब ही नहीं रह जाता
सिर्फ औरतों को ही
इसलिए जोडा़ जाता है
कि औरतें
प्रतिशोध से परे हैं
लाज का दही
मुँह पर जमाये फिरती हैं
इन्हीं तबकों में से
इन्हीं मर्दों के लिये भी
भंड़वे, बदजा़त
और ज़नमुरीद जैसे शब्द भी हैं
लेकिन नहीं करतीं इस्तेमाल
इन शब्दों को
ये खुदगर्ज, मनहूस
और डरपोक औरतें





